मेरठ शहर के ‘क्लब 60’ के वरिष्ठ सदस्य पर्यावरण की शुद्धता और सुरक्षा के लिए खुद से कदम उठा रहे हैं

अपने दिनभर की दिनचर्या से पर्यावरण के लिए समय निकलना हम सभी के लिए मुमकिन नहीं है, उत्तर प्रदेश, मेरठ का एक क्लब अपने मोहल्ले के कूड़े और कचड़े को अपने ही तरीके से साफ़ कर रहा है| हिंदी फिल्म ‘क्लब 60’ से प्रेरणा लेकर शास्त्री नगर के 60 से 70 साल के लोगों ने मिलकर एक क्लब बनाया है|

 

 शून्य कचरा और शून्य पॉलीथीन

क्षेत्र को कचरा मुक्त रखने के लिए, उन्होंने अपने क्षेत्र में एक कंपोस्टिंग इकाई शुरू की है। इस नागरिक परियोजना ने पूरे क्षेत्र को शून्य कचरा और शून्य पॉलीथीन की दिशा में बढ़ने में मदद की है। हरि विष्णोई की अध्यक्षता वाली इस क्लब ने तर्कसंगत से बात की “इससे पहले नगर पालिका पार्क से सूखी पत्तियों को इकट्ठा कर के उसमें आग लगा दिया करती थी, बिना कुछ सोचे कि इसे दोबारा भी उपयोग किया जा सकता है। इसलिए, हमने सेंट्रल ऑर्गेनिक फार्मिंग इंस्टीट्यूट से एक वैज्ञानिक की मदद ली, जिसने हमें एक अपशिष्ट अपघटनकर्ता (वेस्ट डीकम्पोज़र) दिया जिसे हम कंपोस्टिंग इकाई के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।” उन्होनें ने अपने पार्क के कंपोस्टिंग इकाई के बारे में बताया, जिसमें 200 लीटर की क्षमता है, जहाँ वे सूखी पत्तियों और पानी को मिलाकर खाद बनाते हैं।

 

 

सूखे कचड़े का बेहतर उपयोग
यह वर्मीकंपोस्टिंग इकाई दो महीने पहले वृद्ध व्यक्तियों के एक समूह द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उपयोग अब मेरठ शहर में 400 पार्कों में से लगभग 100 पार्कों में किया जाता है। हरि विष्णोई के अनुसार, नियमित विधि की तुलना में ड्राई वेस्ट बनाने का यह एक आसान तरीका है। आम तौर पर, विघटन करने की नियमित विधि वर्मीकंपोस्टिंग से खाद बनाने के लिए अधिक समय लेती है।

उनके काम की सराहना करते हुए, नगर पालिका निगम ने क्लब को वर्मीकंपोस्टिंग इकाई के लिए 1.5 लाख रुपये के साथ पुरस्कृत किया गया है। हरि विष्णोई ने यह भी कहा कि “हर घर में अब सीमेंट पॉट है जिसमें छेद है, जहाँ वे गीले कचड़े को डंप करते हैं और इसे सड़ाते हैं और पार्क में फिर खाद के रूप में उपयोग करते हैं।”

 

इनके पास उनकी खुद की निहित कुछ कुशलताएं हैं

कम्पोस्टिंग यूनिट के अलावे यहाँ के सेवानिवृत बुज़ुर्ग लोगों को योग, बागवानी, आदि जैसे प्रतिभाओं का भी उपयोग यहाँ के लोगों को शिक्षित करने के लिए करते हैं| यह सोशल मीडिया के द्वारा विवाह योग्य युवक युवती के लिए जीवन साथी भी खोजते हैं|

अपने दिनचर्या के बावजूद, 70 लोगों का समूह जो शुरू में एक व्यक्ति द्वारा शुरू किया गया था अंततः एक बड़े परिवार का रूप ले लिया है। उन्होंने व्यक्तिगत समग्र इकाई (कम्पोस्ट यूनिट) पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखा है और साथ ही में कार्बनिक खेती में विस्तार करना शुरू कर दिया है और इसी तरह से यह खुद को पूरे दिन व्यस्त रखते हैं।

हरि विश्नोई कहते हैं “चंडीगढ़ में रॉक गार्डन की तरह, हम यहाँ भी प्लास्टिक इकट्ठा करेंगे और हमारे ब्लॉक में कचड़े से एक पार्क का निर्माण करेंगे”, उनके संगठन को मेरठ शहर के आयुक्त और नोडल अधिकारी द्वारा बेहतर काम के लिए मान्यता भी प्राप्त है। वे आने वाले दिनों में मेरठ शहर के हर घर में जैविक समग्र को भी लागू करना चाहते हैं।

Date Posted :

26 September 2016

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